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MARCH 30, 2016 [बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:7-19]

एक कार्टून श्रंखला Peanuts की एक पात्र है लूसी जो अपने आप को लेकर सदा ही अति आश्वस्त रहती है; एक कार्टून में लूसी को कहते दिखाया गया है, “जब मैं संसार में विद्यमान हूँ तो फिर संसार का बदतर होते जाना कैसे संभव हो सकता है? मेरे जन्म के बाद से ही संसार में होता जा रहा सुधार स्पष्ट दिखाई दे रहा है!”

निशचय ही लूसी की बात असत्य तथा अतिश्योक्ति है, लेकिन जो उसने कहा वह काफी रुचिकर भी है। कैसा रहे यदि हम मसीही विश्वासी, जिस भी स्थान पर परमेश्वर ने हमें रखा है वहाँ अपने जीवन और व्यवहार से प्रभु यीशु के प्रेम को व्यावाहरिक रूप में दिखाएं? ऐसा करने से अवश्य ही हम अपने आस-पास के स्थान और समाज को बेहतर करने पाएंगे।

जब प्रेरित पतरस ने अत्याचार सह रहे मसीही विश्वासियों को पत्री लिखी तो उन्हें प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास के कारण परमेश्वर द्वारा उन्हें दिए गए विशिष्ट दर्जे का स्मरण दिलाया, तथा उन से कहा कि वे अपने भले चाल-चलन के द्वारा उन्हें सताने वाले उन अविश्वासियों के सामने अपने परमेश्वर की महिमा करें (1 पतरस 2:9-12)। दूसरे शब्दों में, हम मसीही विश्वासी अपने कार्यों से संसार को एक बेहतर स्थान बना सकते हैं। उस प्रभाव और परिवर्तन के बारे में ज़रा विचार कीजिए जो मसीह यीशु के समान प्रेम, दया, क्षमा, न्याय और शांति को जीवन का अभिन्न अंग और व्यावाहरिक जीवन में प्रदर्शन करने से हो सकता है। मेरा सदा ही यह मानना रहा है कि यदि हम पतरस द्वारा लिखी गई बात को अपने जीवनों में लागु करेंगे तो हमारे आस-पास के लोग भी यह कहने लगेंगे कि अमुक व्यक्ति के “यहाँ कार्य करने के कारण हमारा दफ्तर बेहतर स्थान है”; या, “हमारा पड़ौस एक बेहतर पड़ौस है”; या, “हमारा विद्यालय एक बेहतर विद्यालय है।”

हम अकेले तो संसार को नहीं बदल सकते, लेकिन जो प्रभाव और परिवर्तन परमेश्वर ने प्रभु यीशु द्वारा हमारे जीवनों में किया है, उसे अपने व्यावाहरिक जीवनों में लागू करके परमेश्वर के अनुग्रह से अपने आस-पास के स्थान को बेहतर अवश्य कर सकते हैं।

संसार को बेहतर करने का मार्ग सबके लिए उपलब्ध है – प्रभु यीशु मसीह को अपने जीवनों से प्रदर्शित करें।

 पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर की प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है। हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उन सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर; उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें। – 1 पतरस 2:9-12

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:7-19

1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो।

1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है।

1 Peter 4:9 बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो।

1 Peter 4:10 जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए।

1 Peter 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।

1 Peter 4:12 हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है।

1 Peter 4:13 पर जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्‍दित और मगन हो।

1 Peter 4:14 फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है।

1 Peter 4:15 तुम में से कोई व्यक्ति हत्यारा या चोर, या कुकर्मी होने, या पराए काम में हाथ डालने के कारण दुख न पाए।

1 Peter 4:16 पर यदि मसीही होने के कारण दुख पाए, तो लज्ज़ित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्वर की महिमा करे।

1 Peter 4:17 क्योंकि वह समय आ पहुंचा है, कि पहिले परमेश्वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उन का क्या अन्‍त होगा जो परमेश्वर के सुसमाचार को नहीं मानते?

1 Peter 4:18 और यदि धर्मी व्यक्ति ही कठिनता से उद्धार पाएगा, तो भक्तिहीन और पापी का क्या ठिकाना?

1 Peter 4:19 इसलिये जो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार दुख उठाते हैं, वे भलाई करते हुए, अपने अपने प्राण को विश्वासयोग्य सृजनहार के हाथ में सौंप दें।

एक साल में बाइबल:

  • न्यायियों 7-8
  • लूका 5:1-16

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