WMTLC हिंदी बूस्टर्स

दैनिक अध्ययन

परमेश्वर के उपहार

spiritual_gifts.gif

APRIL 6, 2016 [बाइबल पाठ: मत्ती 20:1-15]

एक प्रसिद्ध नाटक है Amadeus (अमेडियस) जो 18वीं सदी के एक संगीतज्ञ के परमेश्वर की इच्छा को जानने के प्रयास पर लिखा गया है। इस नाटक का एक पात्र, परमेश्वर भक्त एन्टोनियो सैलिरी की तीव्र इच्छा है कि वह ऐसा संगीतज्ञ बने जिसकी रचनाएं सदा स्मरण करी जाएं, किंतु उसके पास इसकी योग्यता नहीं है। इस बात को लेकर एन्टोनियो बहुत क्षुब्ध रहता है कि परमेश्वर ने उसकी बजाए ऐसा सर्वोत्तम संगीतज्ञ बनाने की योग्य्ता वोल्फ्गैंग अमेडियस मोज़ार्ट को दी है जो परमेश्वर भक्त भी नहीं है तथा स्वभाव से शरारती भी है।

इस नाटक द्वारा, नाटक के लेखक ने वही प्रश्न उठाया है जो परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्युब की पुस्तक के लेखक ने उठाया है, केवल प्रश्न को उठाने का ढ़ंग भिन्न है। अय्युब की पुस्तक में प्रश्न उठाया गया है कि परमेश्वर एक भक्त और धर्मी जन को परेशानियों और दुःख में क्यों आने देता है; जबकि अमेडियस का लेखक प्रश्न उठाता है कि परमेश्वर एक भक्तिहीन और शरारती व्यक्ति को, जो परमेश्वर से किसी भलाई पाने के सर्वथा अयोग्य है, इतनी अनोखी प्रतिभा क्यों प्रदान करता है?

प्रभु यीशु मसीह द्वारा मज़दूरों और उनको मिलने वाले मेहनताने को लेकर कहा गया दृष्टांत, उप्रोक्त विरोधाभास का एक उत्तर समझता है। उस दृष्टांत में एक स्वामी अपने खेत में मज़दुरी के लिए मज़दुरों को ढूंढ़ने जाता है, और उन्हें काम पर लगाता है, और ऐसा वह दिन में कई बार करता है, दिन के अन्तिम घंटे में भी। दिन की स्माप्ति पर वह सब को उनकी निर्धारित मज़दूरी देता है। जिन मज़दूरों ने सारा दिन उसके लिए काम किया वे समझते हैं कि उन्हें उन लोगों से अधिक मज़दूरी मिलेगी जिन्होंने बस घंटा भर ही काम किया था। लेकिन जब स्वामी सबको एक समान ही मज़दूरी देता है तो वे भौंचके रह जाते हैं और इस असंगति को लेकर प्रश्न उठाते हैं। स्वामी उन्हें उत्तर देता है कि वह उनके साथ कोई अन्याय नहीं कर रहा है क्योंकि जितना उन से कार्य आरंभ करने के समय तय हुआ था, उतनी ही मज़दूरी उसने उन्हें दी है, और साथ ही यह भी समझाता है कि यदि वह अपनी संपत्ति में से, स्वेच्छा से, किसी को कुछ देना चाहे तो इससे कौन और क्योंकर उसे रोक सकता है?

प्रभु यीशु के इस दृष्टांत द्वारा जो बात समझाई गई है वह है कि परमेश्वर अपनी सुइच्छा से लोगों को अपने अनुग्रह का दान देता है; यह उसकी सप्रेम भेंट है जिसका मज़दूरी के समान आँकलन कदापि नहीं किया जा सकता है। परमेश्वर जिसे जो देना चाहता है, उसे देता है – उसकी यह इच्छा और इसके पीछे छिपी उसकी भावना या योजना चाहे हमारी समझ में आए या ना आए। उसके उपहार उस से किसी रीति से कमा कर नहीं लिए जा सकते, बस धन्यवादी और कृतज्ञ होकर ग्रहण ही किए जा सकते हैं।

प्रभु यीशु मसीह में होकर मिलने वाली पापों की क्षमा, धार्मिकता और उद्धार भी परमेश्वर के अनुग्रह से मिलने वाले उपहार हैं। हम इन्हें अपनी किसी नेकी या भलाई इत्यादि द्वारा उससे कमा नहीं सकते और ना ही इन बातों के आधार पर परमेश्वर को इन्हें हमें देने के लिए बाध्य कर सकते हैं। जो कोई साधारण विश्वास और सच्चे पश्चाताप के साथ प्रभु यीशु के बलिदान और पुनरुत्थान द्वारा उपलब्ध करवाई गई परमेश्वर की इस अनमोल भेंट को स्वीकार कर लेता है वह परमेश्वर की सनतान और स्वर्ग का अधिकारी हो जाता है।

 परमेश्वर के अनुग्रह के क्षेत्र में, “योग्य होना” कोई अर्थ नहीं रखता।

परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। – इफिसियों 2:4-8

 बाइबल पाठ: मत्ती 20:1-15

Matthew 20:1 स्वर्ग का राज्य किसी गृहस्थ के समान है, जो सवेरे निकला, कि अपने दाख की बारी में मजदूरों को लगाए।

Matthew 20:2 और उसने मजदूरों से एक दीनार रोज पर ठहराकर, उन्हें अपने दाख की बारी में भेजा।

Matthew 20:3 फिर पहर एक दिन चढ़े, निकल कर, और औरों को बाजार में बेकार खड़े देखकर,

Matthew 20:4 उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ, और जो कुछ ठीक है, तुम्हें दूंगा; सो वे भी गए।

Matthew 20:5 फिर उसने दूसरे और तीसरे पहर के निकट निकलकर वैसा ही किया।

Matthew 20:6 और एक घंटा दिन रहे फिर निकल कर औरों को खड़े पाया, और उन से कहा; तुम क्यों यहां दिन भर बेकार खड़े रहे? उन्हों ने उस से कहा, इसलिये, कि किसी ने हमें मजदूरी पर नहीं लगाया।

Matthew 20:7 उसने उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ।

Matthew 20:8 सांझ को दाख बारी के स्‍वामी ने अपने भण्‍डारी से कहा, मजदूरों को बुलाकर पिछलों से ले कर पहिलों तक उन्हें मजदूरी दे दे।

Matthew 20:9 सो जब वे आए, जो घंटा भर दिन रहे लगाए गए थे, तो उन्हें एक एक दीनार मिला।

Matthew 20:10 जो पहिले आए, उन्होंने यह समझा, कि हमें अधिक मिलेगा; परन्तु उन्हें भी एक ही एक दीनार मिला।

Matthew 20:11 जब मिला, तो वह गृहस्थ पर कुडकुड़ा के कहने लगे।

Matthew 20:12 कि इन पिछलों ने एक ही घंटा काम किया, और तू ने उन्हें हमारे बराबर कर दिया, जिन्हों ने दिन भर का भार उठाया और घाम सहा?

Matthew 20:13 उसने उन में से एक को उत्तर दिया, कि हे मित्र, मैं तुझ से कुछ अन्याय नहीं करता; क्या तू ने मुझ से एक दीनार न ठहराया?

Matthew 20:14 जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूं।

Matthew 20:15 क्या उचित नहीं कि मैं अपने माल से जो चाहूं सो करूं? क्या तू मेरे भले होने के कारण बुरी दृष्टि से देखता है?

एक साल में बाइबल:

  • 1 शमूएल 1-3
  • लूका 8:26-56

Witness Ministries

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Information

This entry was posted on April 6, 2016 by in Boosters and tagged , , , , , .
Follow WMTLC हिंदी बूस्टर्स on WordPress.com

Archives

Blog Stats

  • 2,190 hits

Categories

%d bloggers like this: