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दैनिक अध्ययन

सारी सृष्टि का केंद्र

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APRIL 18, 2016 [बाइबल पाठ: भजन 33:6-19]

हाल ही मुझे यह एहसास हुआ कि मैं सृष्टि का केंद्र नहीं हूँ; संसार मेरे चारों ओर नहीं चलता; और ना ही संसार मेरी गति, मेरी दिशा, मेरी इच्छाओं और मेरी योजनाओं के अनुरूप अथवा अनुसार चलता और कार्य करता है। चाहे हम इसे स्वीकार करना ना भी चाहें तो भी सत्य यही है कि जीवन केवल हमारी ही लालसाओं और पसन्द के अनुसार संचालित तथा कार्यकारी नहीं होता है।

परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 33 में हम पाते हैं कि सारी सृष्टि का केंद्र और संचालन केवल परमेश्वर के पास है; उसी ने समुद्र की सीमाएं बांधी हैं और वही सागर के भण्डारों को तय करता है। सृष्टि की हर बात, हर भाग उसके नियमों के अनुसार चलते और कार्य करते हैं। जाति-जाति के लोग भी परमेश्वर द्वारा ही संचालित और नियंत्रित होते हैं। किसी की कोई भी युक्ति या योजना परमेश्वर की युक्ति या योजना के सामने टिक नहीं सकती। अन्ततः परमेश्वर ही की हर योजना सर्वोपरी तथा कार्यन्वित होगी और उसके सभी उद्देश्य सदा ही अटल बने रहेंगे।

परमेश्वर संसार के सभी मनुष्यों पर सर्वदा नज़र बनाए रखता है। हमारे जीवन स्वयं हम पर नहीं वरन परमेश्वर पर केंद्रित रहने के लिए रचे गए हैं। उसने ही हमें और हमारे हृदयों को बनाया है, और हमारे मन की हर बात को वह भली-भांति जानता-समझता है। हमारे जीवनों में हस्तक्षेप करने की सामर्थ और अधिकार उसके पास है और जब भी परिस्थितियाँ हमारे खुद से बाहर होने लगती हैं वह हमें उन से बाहर निकालना जानता है।

हमें उस महान और सर्वशक्तिमान परमेश्वर का कितना धन्यवादी और आभारी होना चाहिए जो सारी सृष्टि का केंद्र है, परन्तु फिर भी हमें व्यक्तिगत रीति से जानता है, हमारे साथ संबंध बनाए रखता है और हमारे जीवन की हर बात को नियंत्रित तथा संचालित करता है, हमें हर बात और हर परिस्थिति में सामर्थ तथा सहायता प्रदान करता है।

जब हम हमारे चारों ओर की संसार की बातों के लिए अपने आप को मरा हुआ मान लेते हैं,

तब हम ऊपर रहने वाले परमेश्वार के लिए जीना आरंभ कर देते हैं।

तो प्रभु के भक्तों को परीक्षा में से निकाल लेना और अधर्मियों को न्याय के दिन तक दण्‍ड की दशा में रखना भी जानता है। – 2 पतरस 2:9

बाइबल पाठ: भजन 33:6-19

Psalms 33:6 आकाशमण्डल यहोवा के वचन से, और उसके सारे गण उसके मुंह ही श्वास से बने।

Psalms 33:7 वह समुद्र का जल ढेर की नाईं इकट्ठा करता; वह गहिरे सागर को अपने भण्डार में रखता है।

Psalms 33:8 सारी पृथ्वी के लोग यहोवा से डरें, जगत के सब निवासी उसका भय मानें!

Psalms 33:9 क्योंकि जब उसने कहा, तब हो गया; जब उसने आज्ञा दी, तब वास्तव में वैसा ही हो गया।

Psalms 33:10 यहोवा अन्य अन्य जातियों की युक्ति को व्यर्थ कर देता है; वह देश देश के लोगों की कल्पनाओं को निष्फल करता है।

Psalms 33:11 यहोवा की युक्ति सर्वदा स्थिर रहेगी, उसके मन की कल्पनाएं पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहेंगी।

Psalms 33:12 क्या ही धन्य है वह जाति जिसका परमेश्वर यहोवा है, और वह समाज जिसे उसने अपना निज भाग होने के लिये चुन लिया हो!

Psalms 33:13 यहोवा स्वर्ग से दृष्टि करता है, वह सब मनुष्यों को निहारता है;

Psalms 33:14 अपने निवास के स्थान से वह पृथ्वी के सब रहने वालों को देखता है,

Psalms 33:15 वही जो उन सभों के हृदयों को गढ़ता, और उनके सब कामों का विचार करता है।

Psalms 33:16 कोई ऐसा राजा नहीं, जो सेना की बहुतायत के कारण बच सके; वीर अपनी बड़ी शक्ति के कारण छूट नहीं जाता।

Psalms 33:17 बच निकलने के लिये घोड़ा व्यर्थ है, वह अपने बड़े बल के द्वारा किसी को नहीं बचा सकता है।

Psalms 33:18 देखो, यहोवा की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करूणा की आशा रखते हैं बनी रहती है,

Psalms 33:19 कि वह उनके प्राण को मृत्यु से बचाए, और अकाल के समय उन को जीवित रखे।

एक साल में बाइबल:

  • 2 शमूएल 3-5
  • लूका 14:25-35

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