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आत्मिक हृदय और वचन

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MAY 7, 2016 [बाइबल पाठ: नीतिवचन 4:20-27]

औसतन, हमारा हृदय एक मिनिट में 70-75 बार धड़कता है; यद्यपि इसका वज़न लगभग 11 आउन्स (312 ग्राम) ही है, फिर भी एक स्वस्थ हृदय प्रतिदिन 60,000 मील (96,560 किओमीटर) लंबी रक्त नलिकाओं से 2000 गैलन (7570 लिटर) रक्त प्रवाहित करता है। प्रतिदिन हृदय एक ट्रक को 20 मील तक ले जाने लायक ऊर्जा उत्पन्न करता है, जो एक सामन्य मानव-जीवनकाल में चन्द्रमा तक जाकर वापस आने के बराबर है। एक स्वस्थ हृदय अद्भुत कार्य कर सकता है; इसके विपरीत, यदि हमारा हृदय बैठ जाए तो हमारा सारा शरीर भी कार्य करना बन्द कर देता है।

यही बात हमारे आत्मिक हृदय के लिए भी कही जा सकती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हृदय या मन हमारी भावनाओं, विचारों, और विवेक का सूचक है। उसे हमारे जीवन का नियंत्रण केन्द्र कहा गया है; इसीलिए हम बाइबल में लिखा पढ़ते हैं कि “सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है” (नीतिवचन 4:23)। यह बहुत महत्वपूर्ण सलाह तो है, परन्तु लोगों के लिए इस सलाह का पालन सामन्यतः कठिन होता है। जीवन हमारे समय तथा सामर्थ पर बहुत ज़ोर मारता है, हमारे सामने ऐसी अनेक परिस्थितियाँ लाता है जिनका तुरंत निवारण करना अति आवश्यक लगता है। इसकी तुलना में परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ना, उस की बातों पर मनन करना, उन बातों का पालन करना जबर्दस्ती हमारा ध्यान नहीं खेंचते, हमें बाध्य नहीं करते। इसलिए इन बातों को नज़रन्दाज़ करना सहज लगता है और ऐसा करने के दुषपरिणामों को हम एक दम से पहचान भी नहीं पाते। लेकिन ये दुषपरिणाम समय के साथ बढ़ते और हमारे जीवनों में जमा होते-होते जाते हैं, हमें परमेश्वर और उसकी बातों से दूर करते चले जाते हैं। परमेश्वर के साथ संगति की यह अवहेलना हमारे आत्मिक “हृदय” और शारीरिक जीवन को कमज़ोर बना देती है, जिससे हमारा आत्मिक जीवन कमज़ोर हो जाता है और हमें आत्मिक हृदयाघात होने का खतरा बन जाता है।

मैं धन्यवादी हूं कि परमेश्वर ने हमें अपना वचन दिया है, उस जीवते वचन के द्वारा वह हम से बातें करता है, हमारा मार्गदर्शन करता है, हमें अपने आप को जाँचने तथा सुधारने के अवसर देता है। परमेश्वर के इस वचन की कभी अवहेलना ना करें; यह वचन आपको परमेश्वर के साथ सही संबंध बनाए रखने में सहायक बना रहेगा।

आत्मिक स्वास्थ्य के लिए सबसे महान चिकित्सक, परमेश्वर से उसके जीवते वचन में होकर परामर्श लें।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। – भजन 119:105

बाइबल पाठ: नीतिवचन 4:20-27

Proverbs 4:20 हे मेरे पुत्र मेरे वचन ध्यान धरके सुन, और अपना कान मेरी बातों पर लगा।

Proverbs 4:21 इन को अपनी आंखों की ओट न होने दे; वरन अपने मन में धारण कर।

Proverbs 4:22 क्योंकि जिनको वे प्राप्त होती हैं, वे उनके जीवित रहने का, और उनके सारे शरीर के चंगे रहने का कारण होती हैं।

Proverbs 4:23 सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है।

Proverbs 4:24 टेढ़ी बात अपने मुंह से मत बोल, और चालबाजी की बातें कहना तुझ से दूर रहे।

Proverbs 4:25 तेरी आंखें साम्हने ही की ओर लगी रहें, और तेरी पलकें आगे की ओर खुली रहें।

Proverbs 4:26 अपने पांव धरने के लिये मार्ग को समथर कर, और तेरे सब मार्ग ठीक रहें।

Proverbs 4:27 न तो दाहिनी ओर मुढ़ना, और न बाईं ओर; अपने पांव को बुराई के मार्ग पर चलने से हटा ले।

एक साल में बाइबल:

  • 1 राजा 21-22
  • लूका 23:26-56

अधिक शिक्षाओं और लेख के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँhttp://www.witnessministries.in

Witness Ministries

 

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One comment on “आत्मिक हृदय और वचन

  1. Sanne
    May 9, 2017

    Thanks for the inthigs. It brings light into the dark!

    Liked by 1 person

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This entry was posted on May 7, 2016 by in Boosters and tagged , , , , , , , , , , , , , , .
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