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जीवन की जड़ें

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JULY 19, 2016 [बाइबल पाठ: यिर्मयाह 17:5-10]

भारत के चेरापूँजी इलाके में रहने वाले लोगों ने अपने इलाके में बहने वाले अनेकों नदी-नालों पर से होकर चलने का एक अनोखा तरीका विकसित कर रखा है। वे लोग वहाँ उगने वाले रबर के वृक्षों की जड़ों को एक पार से दूसरे पार पहुँचाते हैं, उनको सेतु के समान प्रयोग करते हैं। इन जड़ों के सेतुओं को बनकर तैयार होने में 10 से 15 वर्ष तो लगते हैं, लेकिन जब वे तैयार हो चुकते हैं तो बहुत मज़बूत और सैकड़ों साल तक स्थिर बने रहने वाले हो जाते हैं।

परमेश्वर के वचन बाइबल में भी उस मनुष्य के लिए जो परमेश्वर पर विश्वास के साथ रहता है लिखा गया है कि वह, “वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के किनारे पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब गर्मी होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा” (यिर्मयाह 17:8)। क्योंकि उसकी जड़ें गहरी और अच्छे से पोषित रहती हैं, इसलिए वह “वृक्ष” अत्याधिक तापमान भी सह लेता है और अकाल के समय में भी फल देता रहता है।

दृढ़ता से गहरी जड़ पकड़े हुए वृक्ष के समान ही वे लोग भी हैं जो परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं; उन्हें परेशानी की परिस्थितियों में भी स्थिरता और पोषण मिलता रहेगा। इसकी तुलना में वे लोग हैं जो अपने आप पर या अन्य मनुष्यों पर भरोसा रखते हैं, वे अस्थिरता के साथ जीवन व्यतीत करते हैं। बाइबल इन लोगों को मरुभूमि में उगने वाली झाड़ीयों के समान बताती है, जो अकसर अपूर्ण पोषित और अकेली सी होती हैं (पद 6)। जो लोग परमेश्वर को त्याग कर जीते हैं उनके आत्मिक जीवन भी ऐसे ही कुपोषित तथा तन्हा होते हैं।

आज आप की जड़ें कहाँ हैं? क्या आपने मसीह यीशु में अपने जीवन की जड़ें जमाई हैं: “और उसी में जड़ पकड़ते और बढ़ते जाओ; और जैसे तुम सिखाए गए वैसे ही विश्वास में दृढ़ होते जाओ, और अत्यन्‍त धन्यवाद करते रहो” (कुलुस्सियों 2:7)? यदि हाँ, तो क्या आप भी ऐसे सेतु बन रहे हैं जो दूसरों को प्रभु परमेश्वर तक पहुँचाता है? यदि आप मसीह यीशु को व्यक्तिगत रीति से जानते हैं तो आप ऐसे सेतु होने का कार्य कर सकते हैं और लोगों को बता सकते हैं कि धन्य हैं वे जो प्रभु परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं (यिर्मयाह 17:7)।

जो व्यक्ति परमेश्वर में जड़ें जमाए हुए है उसे कठिन परीक्षाएं भी हिला नहीं सकतीं।

क्या ही धन्य है वह पुरूष, जो यहोवा पर भरोसा करता है, और अभिमानियों और मिथ्या की ओर मुड़ने वालों की ओर मुंह न फेरता हो। – भजन 40:4

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 17:5-10

Jeremiah 17:5 यहोवा यों कहता है, श्रापित है वह पुरुष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है, और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है।

Jeremiah 17:6 वह निर्जल देश के अधमूए पेड़ के समान होगा और कभी भलाई न देखेगा। वह निर्जल और निर्जन तथा लोनछाई भूमि पर बसेगा।

Jeremiah 17:7 धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो।

Jeremiah 17:8 वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा।

Jeremiah 17:9 मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है?

Jeremiah 17:10 मैं यहोवा मन की खोजता और हृदय को जांचता हूँ ताकि प्रत्येक जन को उसकी चाल-चलन के अनुसार अर्थात उसके कामों का फल दूं।

एक साल में बाइबल:

  • भजन 20-22
  • प्रेरितों 21:1-17

अधिक शिक्षाओं और लेख के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँhttp://www.witnessministries.in

चुने गए बाइबिल पद :  बाइबल कुछ मुद्दों और विषयों के बारे में क्या कहती हैं, जानना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें [ प्रत्येक विषय के लिए ऑडियो फ़ाइल भी सुन सकते है.]

 https://wordproject.org/bibles/verses/hindi/index.htm

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