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सुलभ मार्ग

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Mar  11, 2017 [बाइबल पाठ: रोमियों 8:13-28]

जब जॉन एफ़. केनेडी अमेरिका के राष्ट्रपति थे तो उनके कार्यकाल में फोटोग्राफरों को कभी कभी उनके दफ्तर का एक चित्ताकर्षक दृश्य फोटो खींचने के लिए मिल जाता था – अपने ओवल दफ्तर में राष्ट्रपति केनेडी अपने मन्त्रीमण्डल के सदस्यों के साथ बैठे हुए सारे संसार को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं, और एक दो वर्षीय बालक, राष्ट्रपति भवन के नियमों और शिष्टाचार की चिंता किए बिना उनके आस-पास घुम-फिर रहा है, या उनकी मेज़ के पास या नीचे रेंग रहा है। वह उनका दो वर्षीय बेटा था, जो राज्यों के गंभीर विषयों एवं उनसे संबंधित चर्चा से बेपरवाह, केवल अपने पिता से मिलने आया था, और पिता के समीप होने का आनन्द उठा रहा था।

चौंका देने वाली इस प्रकार की अत्यंत सरल सुलभता ’अब्बा’ शब्द में मिलती है। जब प्रभु यीशु ने कहा, “…हे अब्‍बा, हे पिता, तुझ से सब कुछ हो सकता है…” (मरकुस 14:36), तो उनका यही अभिप्राय था। निःसन्देह, परमेश्वर इस सारी सृष्टि का सार्वभौमिक प्रभु है, परन्तु प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास के द्वारा उसके पास जाना प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए वैसा ही सुलभ हो गया है जैसा एक बालक के लिए अपने प्रेमी पिता के समीप जाना होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में रोमियों 8 में प्रेरित पौलुस इस करीबी के चित्रण को और भी निकट का बना देता है। पौलुस कहता है, परमेश्वर का पवित्र आत्मा हम में निवास करता है, और जब हम यह नहीं समझ पाते हैं कि क्या और कैसे प्रार्थना करें, तब “इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है” (रोमियों 8:26)

प्रभु यीशु हमारा मेल-मिलाप परमेश्वर पिता के साथ करवाने के लिए आए थे, और उन्होंने हमें दिखाया कि चाहे दो दमड़ी वाली निर्धन विधवा हो, या रोमी सूबेदार हो अथवा अभागा चुँगी लेने वाला, या क्रूस पर टांगा गया डाकू हो – चाहे कोई भी हो, जो भी उसे सच्चे मन से पुकारता है, वह सिद्ध और पवित्र परमेश्वर पिता उसकी सहायता के लिए आता है और उसे बचाता है।

प्रभु यीशु के कलवरी के क्रूस पर दिए गए बलिदान के द्वारा परमेश्वर पिता हमारे इतना निकट गया है, उस तक पहुँचना हमारे लिए इतना सुलभ हो गया है कि हमें बस सच्चे और समर्पित मन से उसे पुकाराना भर है, अपने पापों का अंगीकार कर के उनके लिए पश्चातापी होकर आत्मा में आहें ही भरना है, और उसकी सहायता हमारे लिए उपलब्ध हो जाएगी।

परमेश्वर पिता आपसे मिलने के लिए आतुर है; उसके द्वारा प्रभु यीशु में होकर उपलब्ध करवाए गए सुलभ मार्ग को अपनाएं और परमेश्वर से मेल-मिलाप कर लें।  

प्रार्थना परमेश्वर के साथ घनिष्टता से संवाद करना है।

सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। – रोमियों 5:1

बाइबल पाठ: रोमियों 8:13-28

Romans 8:13 क्योंकि यदि तुम शरीर के अनुसार दिन काटोगे, तो मरोगे, यदि आत्मा से देह की क्रीयाओं को मारोगे, तो जीवित रहोगे।

Romans 8:14 इसलिये कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं।

Romans 8:15 क्योंकि तुम को दासत्व की आत्मा नहीं मिली, कि फिर भयभीत हो परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिस से हम हे अब्बा, हे पिता कह कर पुकारते हैं।

Romans 8:16 आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं।

Romans 8:17 और यदि सन्तान हैं, तो वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं।

Romans 8:18 क्योंकि मैं समझता हूं, कि इस समय के दु:और क्लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं।

Romans 8:19 क्योंकि सृष्टि बड़ी आशाभरी दृष्टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है।

Romans 8:20 क्योंकि सृष्टि अपनी इच्छा से नहीं पर आधीन करने वाले की ओर से व्यर्थता के आधीन इस आशा से की गई।

Romans 8:21 कि सृष्टि भी आप ही विनाश के दासत्व से छुटकारा पाकर, परमेश्वर की सन्तानों की महिमा की स्वतंत्रता प्राप्त करेगी।

Romans 8:22 क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।

Romans 8:23 और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं।

Romans 8:24 आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा?

Romans 8:25 परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं।

Romans 8:26 इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।

Romans 8:27 और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्या है क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिनती करता है।

Romans 8:28 और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।

एक साल में बाइबल:

  • व्यवस्थाविवरण 14-16
  • मरकुस 12:28-44

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चुने गए बाइबिल पद :  बाइबल कुछ मुद्दों और विषयों के बारे में क्या कहती हैं, जाननाचाहते हैं तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें [ प्रत्येक विषय के लिए ऑडियो फ़ाइल भी सुन सकते है.]

 https://wordproject.org/bibles/verses/hindi/index.htm

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